1. समण संघ महान
समण संघ पुरातन धारा,
जैसे गंगा जल की धारा।
प्रकृति जिसकी गाथा गाए,
धरती भी सम्मान बढ़ाए।
बरगद जैसी इसकी जड़ें,
सदियों से जो खड़ी अडिग हैं।
संतों की यह अमर कहानी,
समणों की सच्ची निशानी।
टूटे तिनके उड़ जाते हैं,
मिलकर पर्वत बन जाते हैं।
संघ में जो साथ रहेंगे,
समण तभी विजय कहेंगे।
नदियाँ मिलकर सागर बनतीं,
चिड़ियाँ मिलकर उड़ना जानतीं।
प्रकृति देती यही संदेश,
संघ बनाता जीवन विशेष।
“आजाद” यही अलख जगाए,
समण संघ आगे बढ़ाए।
एकता ही सबसे बड़ी जीत,
यही समणों की सच्ची रीत।
2. संघ की शक्ति
पीपल जैसी ठंडी छाया,
समण संघ ने प्रेम सिखाया।
जंगल, पर्वत, नदी, किनारा,
सबने इसका रूप सँवारा।
यह संघ पुराना इतिहास,
जिसमें बसता अपना विश्वास।
संतों की पावन वाणी है,
यही समणों की कहानी है।
अकेला दीप बुझ जाता है,
मिलकर सूरज बन जाता है।
संघ से जो नाता जोड़ेंगे,
समण तभी आगे बढ़ेंगे।
धरती जैसी इसकी ममता,
सबको देती नई क्षमता।
जो संघ से जुड़कर चलता,
जीवन में वो ऊँचा बढ़ता।
“आजाद” का बस यही कहना,
संघ बिना ना आगे बढ़ना।
मिल-जुलकर जो साथ रहेंगे,
समण हर संघर्ष जीतेंगे।
3. समणों का संघ
समण संघ प्रकृति की छाया,
इसने सबको प्रेम सिखाया।
नदी, हवा और नीला अम्बर,
गाते इसके पावन स्वर।
सदियों पुरानी इसकी शान,
यही हमारी पहचान।
पूर्वजों की अमर विरासत,
संघ हमारी सबसे दौलत।
एक अकेला थक जाएगा,
मिलकर पर्वत हिल जाएगा।
हाथों में जब हाथ रहेंगे,
समण तभी विजयी बनेंगे।
बिखराव केवल हार दिलाए,
एकता सम्मान बढ़ाए।
संघ में ही सच्ची ताकत,
संघ से मिलती हर इज्जत।
“आजाद” यही गीत सुनाए,
समण समाज आगे आए।
संघ रहेगा जब तक साथ,
उज्ज्वल होगा अपना पथ।
4. पुरातन संघ
बरगद जैसी जड़ पुरानी,
समण संघ की अमर कहानी।
संतों ने जो दीप जलाया,
उसने जग को राह दिखाया।
प्रकृति भी संदेश सुनाती,
एकता ही शक्ति कहलाती।
फूल अकेला सूख जाएगा,
गुलदस्ता महक फैलाएगा।
समण जब संग-साथ निभाएँ,
नई सफलता खुद आ जाए।
संघ में ही जीवन की जीत,
संघ से मिलती सच्ची प्रीत।
धरती जैसी इसकी महिमा,
इससे बढ़कर नहीं गरिमा।
जो संघ का सम्मान करेगा,
वही भविष्य निर्माण करेगा।
“आजाद” की यह अमर पुकार,
समण संघ है सबसे महान।
मिल-जुलकर आगे बढ़ना है,
समण होकर जीतना है।
5. प्रकृति का संघ
नदियाँ मिलतीं सागर में,
पक्षी उड़ते झुंडों में।
प्रकृति हमको राह दिखाती,
संघ में ही शक्ति बताती।
समण संघ पुरखों की थाती,
जिससे अपनी शान बढ़ाती।
सदियों से यह दीप जला है,
सत्य का सूरज यहाँ पला है।
जो बिखरे वो हार गए हैं,
जो जुड़े वो पार गए हैं।
संघ में जो साथ रहेंगे,
समण तभी विजय कहेंगे।
पीपल जैसी इसकी छाया,
सबको प्रेम का पाठ पढ़ाया।
यह संघ नहीं केवल नाम,
यह समणों का अभिमान।
“आजाद” यही बात बताए,
संघ समण को जीत दिलाए।
एकता सबसे बड़ी ढाल,
संघ हमारा शक्ति विशाल।
6. संघ और विजय
समण संघ की गाथा न्यारी,
जैसे बगिया लगे प्यारी।
धरती, अम्बर, नदियाँ गाएँ,
समण गौरव जग फैलाएँ।
पुरखों की यह अमर निशानी,
संतों की पावन वाणी।
संघ हमारी सच्ची जान,
इससे ऊँची नहीं पहचान।
मिलकर रहने में बल होता,
संघ से जीवन सफल होता।
टूटे तिनके उड़ जाते हैं,
मिलकर पर्वत बन जाते हैं।
संघ से ही सम्मान मिलेगा,
संघ से नया विहान खिलेगा।
जो अपने संघ से जुड़ता,
वही सफलता को छूता।
“आजाद” यही अलख जगाए,
समण संघ आगे बढ़ाए।
संघ रहेगा जब तक साथ,
रोशन होगा अपना पथ।
7. एकता का गीत
समण संघ प्रकृति की माया,
जिसने सबको राह दिखाया।
जैसे सूरज देता उजियारा,
वैसे संघ बना सहारा।
बरगद जैसी इसकी छाया,
इसने सबको प्रेम सिखाया।
सदियों पुराना इसका मान,
यही समणों की पहचान।
एकता सबसे बड़ी शक्ति,
संघ से मिलती सच्ची भक्ति।
मिल-जुलकर जो साथ चलेंगे,
हर मंज़िल को जीतेंगे।
अकेला दीप बुझ जाता है,
मिलकर सूरज बन जाता है।
संघ में ही जीवन की जीत,
संघ से मिलती सच्ची प्रीत।
“आजाद” यही गीत सुनाए,
समण समाज आगे आए।
संघ हमारा गौरव गान,
समण समाज महान।
8. समण विजय
समण संघ अमर कहानी,
पूर्वजों की पावन निशानी।
नदी, पर्वत, वन और फूल,
सब कहते संघ सबसे मूल।
प्रकृति देती यही पैगाम,
संघ से मिलता सच्चा नाम।
जो संघ का सम्मान करेगा,
वही जीवन धन्य करेगा।
हाथों में जब हाथ रहेंगे,
समण तभी विजयी बनेंगे।
बिखराव केवल हार दिलाए,
एकता सम्मान बढ़ाए।
संघ हमारी शक्ति भारी,
यही हमारी जीत हमारी।
मिल-जुलकर जो साथ चलेंगे,
हर संकट को जीतेंगे।
“आजाद” की यह अमर जुबानी,
संघ हमारी सच्ची कहानी।
संघ रहेगा जब तक साथ,
रोशन होगा अपना पथ।
9. समण संघ की शान
धरती जैसी इसकी ममता,
सूरज जैसी इसकी क्षमता।
समण संघ पुरखों की थाती,
जिससे अपनी शान बढ़ाती।
प्रकृति इसकी गाथा गाए,
हर मौसम सम्मान बढ़ाए।
संघ बना जब मजबूत दीवार,
हार गई हर एक ललकार।
संघ में जो साथ रहेंगे,
समण तभी विजय कहेंगे।
एक अकेला हार जाएगा,
मिलकर पर्वत हिल जाएगा।
संघ हमारी सच्ची ताकत,
यही हमारी सबसे दौलत।
जो अपने संघ से जुड़ता,
वही सफलता को छूता।
“आजाद” यही संदेश सुनाए,
समण समाज आगे आए।
एकता का दीप जलाओ,
समण गौरव जग में लाओ।
10. संघ ही जीवन
समण संघ प्रकृति का फूल,
इससे सुंदर नहीं उसूल।
पीपल जैसी इसकी छाया,
सबको प्रेम का पाठ पढ़ाया।
यह संघ पुराना इतिहास,
जिसमें बसता अपना विश्वास।
संतों की यह अमर कहानी,
समणों की सच्ची निशानी।
मिलकर रहने में बल होता,
संघ से जीवन सफल होता।
संघ से ही सम्मान मिलेगा,
संघ से नया विहान खिलेगा।
नदियाँ मिलकर सागर बनतीं,
चिड़ियाँ मिलकर उड़ना जानतीं।
प्रकृति देती यही संदेश,
संघ बनाता जीवन विशेष।
“आजाद” यही अलख जगाए,
समण संघ आगे बढ़ाए।
मिल-जुलकर सब साथ चलें,
समण बनकर जीत मिलें।
