1. संघघाती से सावधान
जो अपने संघ को तोड़ते हैं,
वो खुद ही राह में छोड़ते हैं।
समण पहचान मिट जाती है,
जब मन में फूट समाती है।
पुरखों की जो शान रही,
संघ से ही पहचान रही।
जिसने संघ का मान रखा,
उसने ऊँचा नाम रखा।
संघघाती बन जो चलता,
अपनों से ही दूर निकलता।
ना सम्मान उसे मिल पाता,
ना इतिहास उसे अपनाता।
समण संस्कृति अमर कहानी,
संघ हमारी सच्ची निशानी।
मिल-जुलकर जो साथ रहेंगे,
समण तभी विजय कहेंगे।
“आजाद” यही बात सुनाए,
संघघाती से समाज बचाए।
एकता में ही सम्मान,
यही समणों की पहचान।
2. समण पहचान
समण समाज की शान बचाओ,
संघघातियों से दूर जाओ।
जो अपने घर आग लगाते,
वो सम्मान कहाँ से पाते।
संघ पुराना बरगद जैसा,
शीतल छाया देता वैसा।
जिसने इसकी जड़ काटी,
उसने अपनी राह बाँटी।
समण होना गर्व की बात,
यही हमारी सच्ची जात।
जो संघ से नाता तोड़े,
वो अपनों से रिश्ता छोड़े।
एकता में शक्ति बसती,
संघ से दुनिया राह दिखती।
जो संगठित होकर चलते,
वो इतिहास नया हैं लिखते।
“आजाद” यही संदेश सुनाए,
समण समाज आगे आए।
संघ बचाओ, मान बचाओ,
अपनी पहचान जगाओ।
3. संघ का दीप
संघ का दीप जलाए रखना,
अपनी जड़ से जुड़े ही रहना।
जो संघघाती बन जाता,
अपनों से ही दूर हो जाता।
समण संस्कृति पावन धारा,
यही समाज का सच्चा सहारा।
पूर्वजों की यह निशानी,
समणों की अमर कहानी।
संघ तोड़ना सरल बहुत है,
पर जोड़ना कठिन बहुत है।
जो मिलकर हाथ बढ़ाते,
वो ही सम्मान हैं पाते।
समणों की शान निराली,
जैसे खेतों की हरियाली।
एकता से जीत मिलेगी,
बिखराव से हार मिलेगी।
“आजाद” यही गीत सुनाए,
संघ सदा मजबूत बनाए।
गर्व से हर बच्चा बोले,
समण नाम दिलों में डोले।
4. संघ की राह
संघ की राह महान रही,
यही हमारी पहचान रही।
जो इस राह से भटक गए,
वो अपनों से ही कट गए।
संघघाती केवल तोड़ता,
समाज का विश्वास ही मोड़ता।
ना संस्कृति का मान करे,
ना पूर्वजों का ध्यान करे।
समण समाज अमर रहेगा,
जब तक संघ मजबूत रहेगा।
एकता सबसे बड़ी ढाल,
संघ हमारा शक्ति विशाल।
धरती जैसी इसकी ममता,
सबको देती नई क्षमता।
जो संघ से नाता जोड़ेंगे,
हर मुश्किल से लड़ लेंगे।
“आजाद” यही बात कहे,
समण सदा आगे बढ़े।
संघ बचाकर रखना सीखो,
अपनी जड़ को मत भूलो।
5. समण गौरव
समण गौरव सबसे प्यारा,
यही जीवन का उजियारा।
संघघाती जो बन जाते,
अपनों को ही दर्द पहुँचाते।
संघ हमारी सच्ची ताकत,
यही हमारी सबसे दौलत।
जिसने संघ का मान किया,
उसने जीवन धन्य किया।
समणों की पहचान यही,
एकता से बढ़ती रही।
जब-जब हम सब साथ रहे,
सम्मान हमारे पास रहे।
जो समाज को तोड़ रहे हैं,
वो अपनों को छोड़ रहे हैं।
ऐसे लोगों से बचना है,
मिल-जुलकर आगे बढ़ना है।
“आजाद” यही अलख जगाए,
समण समाज आगे आए।
एकता का दीप जलाओ,
अपना गौरव फिर लौटाओ।
6. एकता की जीत
संघघाती से सावधान,
वो तोड़े समाज की शान।
मीठी बातें करके अक्सर,
दिल में बोता फूट का ज़हर।
समण संघ बरगद की छाया,
जिसने सबको प्रेम सिखाया।
संतों की पावन वाणी है,
यही हमारी कहानी है।
एक अकेला हार जाएगा,
मिलकर पर्वत हिल जाएगा।
संघ में ही सच्ची जीत,
संघ से मिलती हर प्रीत।
जो अपनी पहचान बचाए,
वो इतिहास नया रच जाए।
समण होना गर्व की बात,
यही हमारी सच्ची जात।
“आजाद” यही गीत सुनाए,
समण समाज आगे आए।
संघ रहेगा जब तक साथ,
रोशन होगा अपना पथ।
7. समण संघ अमर
समण संघ अमर कहानी,
पूर्वजों की पावन निशानी।
जो संघघाती बन जाता,
अपना ही नुकसान कराता।
संघ जोड़ता दिल से दिल,
संघ से खिलते जीवन खिल।
जो समाज को तोड़ रहे हैं,
वो सम्मान को छोड़ रहे हैं।
समणों की शान निराली,
जैसे सावन की हरियाली।
एकता में शक्ति बसती,
यही सफलता राह दिखाती।
अपनी संस्कृति बचानी है,
नई पीढ़ी को सिखानी है।
संघ रहेगा जब तक साथ,
उज्ज्वल होगा अपना पथ।
“आजाद” यही बात बताए,
समण समाज जीत दिलाए।
गर्व से हर कोई बोले,
समण नाम दिलों में डोले।
8. संघ की पुकार
संघ पुकारे आओ साथ,
यही विजय की सच्ची बात।
जो संघघाती बन जाते,
वो अपनों को भूल ही जाते।
समण पहचान अमर रहेगी,
जब तक एकता संग रहेगी।
जो अपनी जड़ों से जुड़ता,
जीवन में वो आगे बढ़ता।
धरती जैसी इसकी ममता,
सबको देती नई क्षमता।
संघ हमारी शक्ति भारी,
यही हमारी जीत हमारी।
बिखराव केवल हार दिलाए,
एकता सम्मान बढ़ाए।
मिल-जुलकर जो साथ चलेंगे,
हर मंज़िल को जीतेंगे।
“आजाद” यही संदेश सुनाए,
समण समाज आगे आए।
संघ बचाओ, मान बचाओ,
अपनी पहचान जगाओ।
9. संघ और सम्मान
संघ से मिलता सम्मान,
यही हमारी पहचान।
जो संघघाती बनते हैं,
वो अपनों से कटते हैं।
पुरखों ने जो दीप जलाया,
उसने जग को राह दिखाया।
उस दीप को बुझने ना दो,
समाज को बिखरने ना दो।
समण संस्कृति अमर कहानी,
इसमें बसती प्रेम निशानी।
एकता सबसे बड़ी ताकत,
यही हमारी सच्ची दौलत।
जो समाज को जोड़ेंगे,
इतिहास नया वो लिखेंगे।
हाथों में जब हाथ रहेंगे,
समण तभी विजयी बनेंगे।
“आजाद” यही गीत सुनाए,
समण गौरव जग में छाए।
संघ रहेगा जब तक साथ,
रोशन होगा अपना पथ।
10. समण एकता
समण एकता सबसे महान,
यही समाज की पहचान।
संघघाती जो बन जाते,
अपनेपन को भूल ही जाते।
संघ हमारी अमर कहानी,
संतों की पावन वाणी।
धरती जैसी इसकी छाया,
सबको प्रेम का पाठ पढ़ाया।
समण होना गर्व की बात,
यही हमारी सच्ची जात।
जो अपनी जड़ों से जुड़ता,
जीवन में वो आगे बढ़ता।
एकता से जीत मिलेगी,
बिखराव से हार मिलेगी।
संघ में ही शक्ति बसती,
यही सफलता राह दिखाती।
“आजाद” यही अलख जगाए,
समण समाज आगे आए।
मिल-जुलकर सब साथ चलें,
समण बनकर जीत मिलें।
