1. समण संदेश
समण संदेश जग में लाओ,
हर दिल में उजियारा छाओ।
सत्य, प्रेम और भाईचारा,
यही जीवन का सच्चा सहारा।
पूर्वजों की पावन वाणी,
समणों की अमर कहानी।
धरती जैसी इसकी ममता,
सबको देती नई क्षमता।
समण संदेश दीप समान,
बढ़ाता सबका सम्मान।
जो इसकी राह अपनाए,
जीवन में सुख वह पाए।
“आज़ाद” यही गीत सुनाए,
समण गौरव जग में छाए।
हर बच्चा यह बात कहे,
समण संस्कृति अमर रहे।
2. समणों की आवाज़
समण संदेश अमर पुकार,
यही जीवन का श्रृंगार।
हर मन में विश्वास जगाए,
नई सुबह का दीप जलाए।
सत्य राह पर चलना सीखो,
हर मुश्किल में हँसना सीखो।
समण संस्कृति सबसे न्यारी,
जैसे फूलों की फुलवारी।
पूर्वजों की यह अमर कहानी,
समणों की पावन निशानी।
जो अपनी जड़ों से जुड़ता,
जीवन में वो आगे बढ़ता।
“आज़ाद” यही बात बताए,
समण समाज जीत दिलाए।
अपनी पहचान बचाओ,
गौरव का दीप जलाओ।
3. समण गौरव संदेश
समण संदेश बड़ा महान,
यही समाज की पहचान।
धरती जैसी इसकी छाया,
सबको प्रेम का पाठ पढ़ाया।
संतों की पावन वाणी है,
समणों की अमर कहानी है।
हर दिल में सम्मान जगाए,
नई पीढ़ी को राह दिखाए।
समणों की शान निराली,
जैसे सावन की हरियाली।
जो अपनी संस्कृति अपनाए,
दुनिया में सम्मान वो पाए।
“आज़ाद” यही अलख जगाए,
समण समाज आगे आए।
हर घर में यह दीप जले,
समण गौरव सदा पले।
4. समण ज्योति
समण संदेश ज्योति बने,
हर अंधियारे को दूर करे।
सत्य और प्रेम की भाषा,
यही जीवन की अभिलाषा।
पूर्वजों की अमर निशानी,
समणों की पावन कहानी।
धरती जैसी इसकी ममता,
सबको देती नई क्षमता।
जो इस संदेश को अपनाए,
जीवन में सम्मान वो पाए।
एकता में शक्ति बसती,
यही सफलता राह दिखाती।
“आज़ाद” यही गीत सुनाए,
समण संस्कृति जग में छाए।
गर्व से हर कोई बोले,
समण नाम दिलों में डोले।
5. समण संस्कृति
समण संदेश प्रेम सिखाए,
हर दिल को इंसान बनाए।
ना ऊँच-नीच, ना कोई भेद,
सबको देता समान संदेश।
समण संस्कृति अमर रहेगी,
जब तक एकता संग रहेगी।
पूर्वजों का मान बढ़ाओ,
अपनी जड़ों से जुड़ जाओ।
समणों की शान निराली,
जैसे खेतों की हरियाली।
जो अपनी पहचान बचाए,
जीवन में सम्मान वो पाए।
“आज़ाद” यही संदेश सुनाए,
समण गौरव जग में छाए।
नई सुबह का दीप जलाओ,
समण संस्कृति अपनाओ।
6. समण पथ
समण संदेश राह दिखाए,
हर मुश्किल को दूर भगाए।
सत्य राह का यही उजियारा,
यही जीवन का सहारा।
संतों की पावन वाणी है,
समणों की अमर कहानी है।
जो इस राह पर चल पाए,
जीवन में सुख वह पाए।
धरती जैसी इसकी ममता,
सबको देती नई क्षमता।
समण समाज महान रहे,
हर दिल में सम्मान रहे।
“आज़ाद” यही अलख जगाए,
समण समाज आगे आए।
अपनी पहचान बचाओ,
गौरव का दीप जलाओ।
7. समण दीपक
समण संदेश दीपक जैसा,
अंधियारे में सूरज जैसा।
हर मन में विश्वास जगाए,
जीवन को सुंदर बनवाए।
पूर्वजों की अमर कहानी,
समणों की पावन निशानी।
सत्य और प्रेम का सहारा,
यही जीवन का उजियारा।
समण संस्कृति सबसे प्यारी,
जैसे फूलों की फुलवारी।
जो अपनी जड़ों से जुड़ता,
जीवन में वो आगे बढ़ता।
“आज़ाद” यही गीत सुनाए,
समण समाज आगे आए।
गर्व से हर बच्चा बोले,
समण नाम दिलों में डोले।
8. समण सम्मान
समण संदेश सम्मान बने,
हर मानव की पहचान बने।
प्रेम और करुणा की भाषा,
यही जीवन की अभिलाषा।
समणों की शान निराली,
जैसे सावन की हरियाली।
पूर्वजों की सीख महान,
यही हमारी सच्ची आन।
जो अपनी संस्कृति अपनाए,
दुनिया में सम्मान वो पाए।
एकता का दीप जलाओ,
समण गौरव आगे लाओ।
“आज़ाद” यही बात कहे,
समण सदा आगे बढ़े।
हर दिल में यह दीप जले,
समण संस्कृति सदा पले।
9. समण अमर वाणी
समण संदेश अमर वाणी,
जिसमें बसती प्रेम कहानी।
धरती जैसी इसकी छाया,
सबको प्रेम का पाठ पढ़ाया।
सत्य राह पर चलना सीखो,
हर मुश्किल में हँसना सीखो।
समण संस्कृति सबसे न्यारी,
जैसे बगिया लगे प्यारी।
पूर्वजों का मान बढ़ाओ,
नई पीढ़ी को राह दिखाओ।
जो अपनी पहचान बचाए,
जीवन में सम्मान वो पाए।
“आज़ाद” यही संदेश सुनाए,
समण समाज आगे आए।
गर्व से हर कोई बोले,
समण नाम दिलों में डोले।
10. समण जागृति
समण संदेश जागृति लाए,
हर दिल में उत्साह जगाए।
सत्य, प्रेम और भाईचारा,
यही जीवन का उजियारा।
समण समाज महान रहे,
हर दिल में सम्मान रहे।
पूर्वजों की पावन थाती,
जिससे दुनिया शान बढ़ाती।
समण संस्कृति अमर कहानी,
इसमें बसती प्रेम निशानी।
जो अपनी जड़ों से जुड़ता,
जीवन में वो आगे बढ़ता।
“आज़ाद” यही अलख जगाए,
समण गौरव जग में छाए।
एकता का दीप जलाओ,
समण संस्कृति अपनाओ।
