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Saman Sandesh > समण कविता > मेरी पहचान समण पर 10 कविताएँ
समण कविता

मेरी पहचान समण पर 10 कविताएँ

admin
Last updated: June 19, 2026 11:23 am
admin Published June 19, 2026
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1. समण मेरी असली पहचान

समण मेरी असली पहचान,
यही मेरा सच्चा सम्मान।
पुरखों की पावन यह थाती,
जिससे दुनिया शान बढ़ाती।

Contents
1. समण मेरी असली पहचान2. मेरी पहचान समण3. समण गौरव4. मैं समण हूँ5. समण संस्कृति6. समण समाज महान7. समण अभिमान8. समण दीप9. समण ज्योति10. समण पहचान महान

धरती जैसी इसकी ममता,
सबको देती नई क्षमता।
सत्य राह पर चलना सीखा,
हर दुख में भी हँसना सीखा।

समण संस्कृति अमर कहानी,
इसमें बसती प्रेम निशानी।
जो अपनी जड़ों से जुड़ता,
जीवन में वो आगे बढ़ता।

“आज़ाद” यही अलख जगाए,
समण गौरव जग में छाए।
गर्व से हर बच्चा बोले,
समण नाम दिलों में डोले।


2. मेरी पहचान समण

मेरी पहचान समण समाज,
यही मेरे जीवन का ताज।
ना झुकना है, ना डरना है,
सत्य राह पर आगे बढ़ना है।

समणों की शान निराली,
जैसे सावन की हरियाली।
पूर्वजों की अमर कहानी,
समणों की पावन निशानी।

संस्कृति अपनी सबसे प्यारी,
जैसे फूलों की फुलवारी।
जो अपनी मिट्टी को जाने,
दुनिया उसको पहचाने।

“आज़ाद” यही संदेश सुनाए,
समण समाज आगे आए।
अपनी पहचान बचाओ,
गौरव का दीप जलाओ।


3. समण गौरव

समण मेरी असली शान,
यही मेरा अभिमान।
धरती जैसी इसकी माया,
सबको प्रेम का पाठ पढ़ाया।

संतों की पावन वाणी है,
समणों की अमर कहानी है।
हर दिल में सम्मान जगाए,
नई पीढ़ी को राह दिखाए।

जो अपनी पहचान बचाए,
जीवन में सम्मान वो पाए।
अपनी जड़ों से जुड़ जाना,
यही जीवन का सच्चा गाना।

“आज़ाद” यही गीत सुनाए,
समण संस्कृति जग में छाए।
हर दिल में यह दीप जले,
समण समाज सदा पले।


4. मैं समण हूँ

मैं समण हूँ, यही पुकार,
यही जीवन का श्रृंगार।
समण मेरी असली पहचान,
यही मेरा सच्चा सम्मान।

संस्कृति मेरी सबसे न्यारी,
जैसे चाँदनी लगे प्यारी।
सत्य और प्रेम का नाता,
हर मन में विश्वास जगाता।

पूर्वजों का अमर उजियारा,
यही जीवन का सहारा।
जो अपनी जड़ों से जुड़ता,
जीवन में वो आगे बढ़ता।

“आज़ाद” यही बात कहे,
समण सदा आगे बढ़े।
गर्व से अपनी बात कहो,
समण होकर आगे बढ़ो।


5. समण संस्कृति

समण संस्कृति सबसे प्यारी,
जैसे बगिया लगे न्यारी।
हर दिल में प्रेम जगाए,
जीवन को सुंदर बनाए।

समण मेरी असली पहचान,
यही मेरा सबसे बड़ा मान।
सत्य राह पर चलना सीखा,
हर दुख में भी हँसना सीखा।

पूर्वजों की यह अमर कहानी,
समणों की पावन निशानी।
जो अपनी संस्कृति अपनाए,
वो दुनिया में सम्मान पाए।

“आज़ाद” यही अलख जगाए,
समण समाज आगे आए।
अपनी जड़ों से जुड़ जाओ,
गौरव का दीप जलाओ।


6. समण समाज महान

समण समाज महान रहे,
हर दिल में सम्मान रहे।
समण मेरी असली पहचान,
यही मेरी सच्ची शान।

धरती जैसी इसकी ममता,
सबको देती नई क्षमता।
सत्य और प्रेम का सहारा,
यही जीवन का उजियारा।

पूर्वजों की अमर निशानी,
समणों की पावन कहानी।
जो अपनी पहचान बचाए,
जीवन में सम्मान वो पाए।

“आज़ाद” यही गीत सुनाए,
समण गौरव जग में छाए।
गर्व से हर कोई बोले,
समण नाम दिलों में डोले।


7. समण अभिमान

समण मेरा स्वाभिमान,
यही मेरी सच्ची पहचान।
हर मुश्किल में साथ निभाए,
जीवन को सुंदर बनवाए।

समणों की शान निराली,
जैसे खेतों की हरियाली।
पूर्वजों की सीख महान,
यही हमारी सच्ची आन।

जो अपनी जड़ों से जुड़ता,
जीवन में वो आगे बढ़ता।
संस्कृति अपनी अमर रहेगी,
जब तक एकता संग रहेगी।

“आज़ाद” यही बात बताए,
समण समाज जीत दिलाए।
अपनी पहचान बचाओ,
नई सुबह का दीप जलाओ।


8. समण दीप

समण दीप सदा जलता,
हर अंधियारा दूर करता।
समण मेरी असली पहचान,
यही मेरा सच्चा सम्मान।

संस्कृति मेरी सबसे न्यारी,
जैसे फूलों की फुलवारी।
सत्य राह पर चलना सीखो,
हर मुश्किल में हँसना सीखो।

पूर्वजों की अमर कहानी,
समणों की पावन निशानी।
जो अपनी पहचान बचाए,
दुनिया में सम्मान वो पाए।

“आज़ाद” यही संदेश सुनाए,
समण गौरव जग में छाए।
एकता का दीप जलाओ,
अपनी संस्कृति बचाओ।


9. समण ज्योति

समण ज्योति अमर रहेगी,
जब तक दुनिया संग रहेगी।
समण मेरी असली पहचान,
यही मेरा सबसे बड़ा मान।

धरती जैसी इसकी छाया,
सबको प्रेम का पाठ पढ़ाया।
संतों की वाणी अमृत जैसी,
बरगद की छाया जैसी।

जो अपनी जड़ों से जुड़ता,
जीवन में वो आगे बढ़ता।
अपनी संस्कृति को अपनाओ,
नई दुनिया को राह दिखाओ।

“आज़ाद” यही गीत सुनाए,
समण समाज आगे आए।
हर दिल में यह दीप जले,
समण गौरव सदा पले।


10. समण पहचान महान

समण पहचान महान रहे,
हर दिल में सम्मान रहे।
यही मेरी सच्ची शान,
यही मेरा अभिमान।

पूर्वजों की पावन थाती,
जिससे दुनिया शान बढ़ाती।
सत्य, प्रेम और भाईचारा,
यही जीवन का सहारा।

समण संस्कृति अमर कहानी,
इसमें बसती प्रेम निशानी।
जो अपनी पहचान बचाए,
जीवन में सम्मान वो पाए।

“आज़ाद” यही अलख जगाए,
समण समाज आगे आए।
गर्व से हर बच्चा बोले,
समण नाम दिलों में डोले।

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