1. मैं समण हूँ
मैं समण हूँ, यही अभिमान,
यही मेरी सच्ची पहचान।
पुरखों की पावन यह थाती,
जिससे दुनिया शान बढ़ाती।
सत्य राह पर चलना सीखा,
हर दुख में भी हँसना सीखा।
संस्कृति मेरी सबसे न्यारी,
जैसे बगिया लगे प्यारी।
“आजाद” यही गीत सुनाए,
समण गौरव जग में छाए।
सीना तान के सब ये बोलो,
अपनी पहचान कभी ना खोलो।
2. समण पहचान
मेरी मिट्टी, मेरा मान,
समण होना मेरा अभिमान।
धरती जैसी इसकी ममता,
सबको देती नई क्षमता।
पूर्वजों का अमर उजाला,
समण समाज लगे निराला।
सत्य, प्रेम और भाईचारा,
यही हमारा सच्चा सहारा।
“आजाद” की बस यही पुकार,
समण समाज रहे शानदार।
जो अपनी जड़ों से जुड़ता,
वही सफलता को छूता।
3. समणों की शान
समणों की शान निराली,
जैसे सावन की हरियाली।
हर दिल में सम्मान जगाए,
अपनी संस्कृति आगे लाए।
पुरखों ने जो दीप जलाया,
उसने जग को राह दिखाया।
उनकी वाणी अमृत जैसी,
शीतल छाया बरगद जैसी।
“आजाद” यही अलख जगाए,
समण समाज आगे आए।
गर्व से हर बच्चा बोले,
समण नाम दिलों में डोले।
4. मेरी पहचान
मैं समण हूँ, यह मेरी जान,
यही मेरी सच्ची पहचान।
ना झुकना है, ना डरना है,
सत्य राह पर आगे बढ़ना है।
समण संस्कृति अमर कहानी,
इसमें बसती प्रेम निशानी।
धरती जैसी इसकी माया,
सबको प्रेम का पाठ पढ़ाया।
“आजाद” का यह संदेश,
समण समाज बने विशेष।
एकता का दीप जलाओ,
अपना गौरव जग में लाओ।
5. समण गौरव
मैं समण हूँ, यह अभिमान,
सबसे ऊँची अपनी शान।
मेरी संस्कृति मेरी ताकत,
यही मेरी सबसे दौलत।
संतों की पावन वाणी है,
समणों की अमर कहानी है।
जो अपनी पहचान बचाए,
दुनिया में सम्मान वो पाए।
“आजाद” यही गीत सुनाए,
समण समाज आगे आए।
अपने गौरव को अपनाओ,
नई सुबह का दीप जलाओ।
6. समण संस्कृति
समण संस्कृति सबसे प्यारी,
जैसे फूलों की फुलवारी।
इसमें प्रेम का दीप जले,
हर मन में सम्मान पले।
पुरखों का संदेश महान,
यही हमारी सच्ची आन।
जो अपनी जड़ों से जुड़ता,
जीवन में वो आगे बढ़ता।
“आजाद” यही बात बताए,
समण समाज जीत दिलाए।
गर्व से अपनी बात कहो,
समण होकर आगे बढ़ो।
7. समण समाज
समण समाज मेरी पहचान,
यही मेरा सच्चा सम्मान।
सत्य की राहों पर चलना,
हर मुश्किल में आगे बढ़ना।
पूर्वजों की यह अमर कहानी,
समणों की पावन निशानी।
एकता में शक्ति बसती,
यही सफलता राह दिखाती।
“आजाद” का सपना यही,
समण समाज झुके ना कभी।
हर दिल में यह दीप जले,
समण गौरव सदा पले।
8. गर्व से कहो
गर्व से बोलो मैं समण हूँ,
सत्य राह का दर्पण हूँ।
मेरी संस्कृति सबसे न्यारी,
जैसे लगे चाँदनी प्यारी।
समणों की शान महान,
इससे ऊँची नहीं पहचान।
धरती जैसी इसकी ममता,
सबको देती नई क्षमता।
“आजाद” यही बात कहे,
समण सदा आगे बढ़े।
अपने गौरव को अपनाओ,
नई दुनिया को राह दिखाओ।
9. समण दीप
समण दीप सदा जलता है,
हर अँधियारा दूर करता है।
सत्य की राह दिखाता है,
हर दिल में विश्वास जगाता है।
समण होना गर्व की बात,
यही हमारी सच्ची जात।
पूर्वजों का अमर सम्मान,
यही हमारी पहचान।
“आजाद” यही गीत सुनाए,
समण संस्कृति जग में छाए।
एकता का दीप जलाओ,
समण गौरव बढ़ाते जाओ।
10. समण अभिमान
मैं समण हूँ, यह गर्व बड़ा,
जैसे सूरज का उजियारा।
मेरी जड़ें बहुत पुरानी,
समणों की अमर कहानी।
संस्कृति मेरी सबसे न्यारी,
जैसे खेतों की हरियाली।
जो अपनी पहचान बचाए,
दुनिया में सम्मान वो पाए।
“आजाद” यही संदेश सुनाए,
समण समाज आगे आए।
गर्व से हर बच्चा बोले,
समण नाम दिलों में डोले।
11. समण राह
समण राह बड़ी निराली,
जैसे फूलों की रखवाली।
सत्य और प्रेम का नाता,
हर दिल में विश्वास जगाता।
पूर्वजों की अमर कहानी,
समणों की पावन निशानी।
जो अपनी जड़ों से जुड़ता,
जीवन में वो आगे बढ़ता।
“आजाद” यही अलख जगाए,
समण समाज आगे आए।
अपनी संस्कृति बचानी है,
नई पीढ़ी को सिखानी है।
12. समण गीत
मैं समण हूँ, यही गीत,
यही मेरी सच्ची प्रीत।
धरती जैसी इसकी ममता,
सबको देती नई क्षमता।
समण संस्कृति अमर रहेगी,
जब तक एकता संग रहेगी।
गर्व से अपनी बात कहो,
समण होकर आगे बढ़ो।
“आजाद” यही बात बताए,
समण गौरव जग में छाए।
हर दिल में यह दीप जले,
समण समाज सदा पले।
13. समण विजय
समण नाम बड़ा महान,
यही हमारी सच्ची शान।
सत्य राह पर चलना सीखा,
हर दुख में भी हँसना सीखा।
समण संस्कृति अमर कहानी,
इसमें बसती प्रेम निशानी।
जो अपनी पहचान बचाए,
जीवन में सम्मान वो पाए।
“आजाद” यही गीत सुनाए,
समण समाज आगे आए।
एकता का दीप जलाओ,
समण गौरव बढ़ाते जाओ।
14. समण ज्योति
समण ज्योति सदा जलती,
हर अँधियारा दूर करती।
सत्य की राह दिखाती है,
जीवन को सुंदर बनाती है।
समणों की शान निराली,
जैसे सावन की हरियाली।
जो अपनी जड़ों से जुड़ता,
जीवन में वो आगे बढ़ता।
“आजाद” यही बात कहे,
समण सदा आगे बढ़े।
अपने गौरव को अपनाओ,
नई सुबह का दीप जलाओ।
15. समण संस्कृति महान
समण संस्कृति महान रहे,
हर दिल में सम्मान रहे।
पुरखों की यह अमर कहानी,
समणों की पावन निशानी।
सत्य राह पर चलना सीखो,
हर मुश्किल में हँसना सीखो।
जो अपनी पहचान बचाए,
दुनिया में सम्मान वो पाए।
“आजाद” यही अलख जगाए,
समण समाज आगे आए।
एकता का दीप जलाओ,
समण गौरव जग में लाओ।
16. समण संसार
समण संसार बड़ा प्यारा,
यही जीवन का सहारा।
धरती जैसी इसकी ममता,
सबको देती नई क्षमता।
समणों की शान महान,
यही हमारी पहचान।
जो अपनी जड़ों से जुड़ता,
जीवन में वो आगे बढ़ता।
“आजाद” यही गीत सुनाए,
समण समाज आगे आए।
गर्व से हर बच्चा बोले,
समण नाम दिलों में डोले।
17. समण स्वाभिमान
मैं समण हूँ, यही स्वाभिमान,
यही मेरा सच्चा सम्मान।
सत्य की राहों पर चलना,
हर मुश्किल में आगे बढ़ना।
पूर्वजों की अमर कहानी,
समणों की पावन निशानी।
जो अपनी पहचान बचाए,
जीवन में सम्मान वो पाए।
“आजाद” यही संदेश सुनाए,
समण गौरव जग में छाए।
एकता का दीप जलाओ,
नई सुबह का गीत सुनाओ।
18. समण वाणी
समण वाणी अमृत जैसी,
बरगद की छाया जैसी।
हर दिल में प्रेम जगाए,
जीवन को सुंदर बनाए।
समण संस्कृति सबसे प्यारी,
जैसे फूलों की फुलवारी।
जो अपनी जड़ों से जुड़ता,
जीवन में वो आगे बढ़ता।
“आजाद” यही बात बताए,
समण समाज जीत दिलाए।
गर्व से अपनी बात कहो,
समण होकर आगे बढ़ो।
19. समण सम्मान
समण सम्मान बड़ा महान,
यही हमारी पहचान।
सत्य राह पर चलना सीखो,
हर दुख में भी हँसना सीखो।
पुरखों की पावन निशानी,
समणों की अमर कहानी।
जो अपनी पहचान बचाए,
दुनिया में सम्मान वो पाए।
“आजाद” यही गीत सुनाए,
समण समाज आगे आए।
एकता का दीप जलाओ,
समण गौरव बढ़ाते जाओ।
20. मैं समण हूँ
मैं समण हूँ, यही पुकार,
यही जीवन का श्रृंगार।
समण संस्कृति अमर कहानी,
इसमें बसती प्रेम निशानी।
धरती जैसी इसकी ममता,
सबको देती नई क्षमता।
जो अपनी जड़ों से जुड़ता,
जीवन में वो आगे बढ़ता।
“आजाद” यही संदेश सुनाए,
समण गौरव जग में छाए।
गर्व से हर कोई बोले,
समण नाम दिलों में डोले।
