बरेली, उत्तर प्रदेश | समण सन्देश प्रतिनिधि
रविवार, 26 जुलाई 2026 को समण संघ की टीम द्वारा बोधिसत्त्व डॉ. भीमराव अम्बेडकर बुद्ध विहार, अशरफ खाँ छावनी (हार्टमैन इंटर कॉलेज के निकट), बरेली में एक संक्षिप्त समण संगति का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समण समाज की एकता, समण पहचान, समण संस्कृति तथा समण संघ की विचारधारा पर विस्तार से चर्चा की गई।
संगति का शुभारम्भ समण समाज के महापुरुषों के प्रति श्रद्धांजलि एवं संघ वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर समण संत बाबूराम जी तथा समण संघ के प्रवक्ता समण रामविलास जी, लालाराम वैष्णव, प्रताप सिंह समण, आरुष, सिद्धार्थ अशोक, कुणाल अशोक, श्रीमती अनीता सिंह, किरण वर्मा एवं राजेंद्र सिंह ने उपस्थित समण भाई-बहनों को संबोधित किया।
वक्ताओं ने तथागत बुद्ध, बोधिसत्त्व डॉ. भीमराव अम्बेडकर तथा अन्य समण महापुरुषों के जीवन-दर्शन, सामाजिक योगदान और मानवतावादी विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समण समाज की प्रगति का आधार अपने महापुरुषों के आदर्शों को जीवन में अपनाना तथा समाज में समता, शिक्षा और बंधुत्व की भावना को सुदृढ़ करना है।
कार्यक्रम में समण संघ के 10 सुनहरे नियम (गोल्डन रूल्स), समण समाज के इतिहास एवं समण संस्कृति की जानकारी भी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि समण समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी समण पहचान और संघीय एकता है। जब समाज एक साझा पहचान के साथ नियमित रूप से संगठित होकर विचार-विमर्श करेगा, तभी सामाजिक जागरूकता, आत्मसम्मान और सामूहिक शक्ति का विकास होगा।
इस अवसर पर भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया गया तथा संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया गया। साथ ही सामाजिक शिक्षा, जागरूकता और समण समाज के सर्वांगीण विकास पर भी विशेष चर्चा हुई।
संगति के दौरान उपस्थित समण साथियों को समण ग्रंथ, भारतीय संविधान, समण कैलेंडर तथा अन्य जागरूकता साहित्य वितरित किया गया। वक्ताओं ने सभी से समण संघ की “जुड़ने और जोड़ने” की मुहिम को आगे बढ़ाने तथा अधिक से अधिक समण परिवारों तक समण पहचान का संदेश पहुँचाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का समापन समाज की एकता, समण पहचान और संघ को सशक्त बनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
“समण पहचान अपनाइए, नियमित रूप से संगति और सन्निपात बहुल में शामिल होकर समाज की सामाजिक शक्ति को सुदृढ़ बनाइए। संघ में ही शक्ति है।”
