मैनपुरी, उत्तर प्रदेश | समण सन्देश प्रतिनिधि
समण समाज में जागरूकता, संगठन और पहचान को मजबूत बनाने के उद्देश्य से समण वेद प्रकाश द्वारा जनपद मैनपुरी में विशेष जनसंपर्क एवं समण संदेश अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में समण परिवारों, युवाओं, बुद्धिजीवियों और समाज के वरिष्ठ साथियों से मुलाकात कर उन्हें समण संघ की विचारधारा एवं “#मैंसमणहूँ” अभियान से जोड़ा जा रहा है।
अभियान के दौरान एक प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब एक समण युवा से मुलाकात हुई। उस युवा ने दूसरे समण साथी से परिचय कराया और फिर दूसरे साथी ने तीसरे समण बंधु से मिलवाया। इस प्रकार संवाद और संपर्क की श्रृंखला आगे बढ़ती गई तथा प्रत्येक मुलाकात के साथ समण समाज के बीच संगठन और पहचान का संदेश मजबूत होता गया। इस अवसर पर कई समण साथियों को “#मैंसमणहूँ” ग्रंथ भी भेंट किया गया।
मैनपुरी में आयोजित बैठकों और संवाद कार्यक्रमों में समण समाज के इतिहास, समण संस्कृति, समण सभ्यता तथा महासमण संतों की विचारधारा पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि समाज की उन्नति, सम्मान और सुरक्षा का आधार संघ है। यदि समाज को मजबूत बनाना है तो प्रत्येक समण को एक-दूसरे से जुड़ना होगा और सामूहिक रूप से आगे बढ़ना होगा।
इस अवसर पर यह विचार प्रमुखता से सामने आया कि प्राकृतिक समण संघ की अवधारणा समाज को एक मंच पर लाने का माध्यम है। उपस्थित साथियों ने कहा कि समण संतों ने सदैव संघ, भाईचारे और सामूहिक जीवन पर बल दिया है। आज के समय में भी वही विचार समाज के लिए मार्गदर्शक हैं।
बैठकों में शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, स्वरोजगार, पारिवारिक संपर्क तथा समण पहचान को जन-जन तक पहुंचाने के विषय पर भी चर्चा हुई। उपस्थित लोगों ने अधिक से अधिक समण परिवारों तक पहुंचने और उन्हें संघ से जोड़ने का संकल्प व्यक्त किया।
समण वेद प्रकाश ने कहा कि समाज के बीच संवाद बढ़ रहा है और लोग अपनी पहचान को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो रहे हैं। उन्होंने सभी समण साथियों से नियमित संपर्क, सन्निपात बहुल में सहभागिता तथा “जुड़ने और जोड़ने” के अभियान को आगे बढ़ाने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान समण साहित्य एवं “#मैंसमणहूँ” ग्रंथ का वितरण भी किया गया, जिसे उपस्थित साथियों ने उत्साहपूर्वक स्वीकार किया।
“एक समण से दूसरा समण, दूसरे से तीसरा समण — यही संघ की शक्ति है।”
