“चन्दा कभी नहीं” गोल्डन नियम एवं सामाजिक चेतना पर हुआ मंथन
सूरतगढ़, राजस्थान | समण सन्देश प्रतिनिधि
रविवार, 26 जुलाई 2026 को सूरतगढ़ थर्मल समण संघ के साप्ताहिक सन्निपात बहुल (साप्ताहिक चौपाल) के क्रम में सामुदायिक भवन पार्क, थर्मल कॉलोनी, सूरतगढ़ में तीसरा सन्निपात बहुल सायं 6:30 बजे से 8:00 बजे तक उत्साह, अनुशासन और समणीय वातावरण में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में समण साथियों ने नियमित रूप से एकत्रित होकर समण समाज की एकता, समण पहचान तथा समण संघ की कार्यप्रणाली पर विस्तृत चर्चा की। बैठक का मुख्य विषय समण संघ का द्वितीय गोल्डन नियम – “चन्दा कभी नहीं” रहा। इस विषय पर विस्तार से विचार रखते हुए वक्ताओं ने कहा कि समण संघ समाज के सहयोग, स्वैच्छिक सहभागिता और व्यक्तिगत उत्तरदायित्व की भावना पर आधारित है। संघ की गतिविधियाँ किसी प्रकार के चंदे पर नहीं, बल्कि समण समाज की जागरूकता, आत्मीयता और सक्रिय भागीदारी पर आधारित हैं।
“समण पहचान के साथ नियमित रूप से इकट्ठा होना ही सामाजिक शक्ति का आधार है। जुड़ेंगे, जोड़ेंगे और समाज को सशक्त बनाएँगे।”
बैठक में हाल ही में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों द्वारा किए गए आंदोलन की सफलता पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि जब लोग किसी साझा उद्देश्य के लिए शांतिपूर्ण, संगठित और जागरूक होकर आगे आते हैं, तो सकारात्मक परिवर्तन की संभावनाएँ बढ़ती हैं। इस संदर्भ में समण समाज के बीच भी नियमित संवाद, सामाजिक चेतना और एकजुटता को और मजबूत करने पर बल दिया गया।
सन्निपात बहुल के दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि साप्ताहिक चौपाल की परंपरा को निरंतर जारी रखा जाएगा, ताकि अधिक से अधिक समण परिवार समण पहचान, समण संस्कृति और संघ की विचारधारा से जुड़ सकें। वक्ताओं ने कहा कि नियमित बैठकों से समाज में आत्मविश्वास, पारस्परिक सहयोग और सामाजिक शक्ति का निरंतर विकास होता है।
इस अवसर पर समण बी.एल. चौल्डा, समण डी.पी. चांदोलिया, समण बली राम मेघवाल, समण एस.पी. मथुरिया, समण भगवान दास जाटव, समण इंद्र सिंह, समण पूरण मल तथा समण मनफूल राम सहित अनेक समण साथियों ने सहभागिता कर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का समापन समण समाज की एकता, समण पहचान और संघ की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
