समण पहचान के साथ इकट्ठा होकर ही बनेगी सामाजिक शक्ति
अमरोहा, उत्तर प्रदेश | समण सन्देश प्रतिनिधि
अमरोहा स्थित सुमंगलम होटल में समण समाज के प्रबुद्धजनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, सेवानिवृत्त अधिकारियों, युवाओं एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए समाज प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य विषय था— “सामाजिक एकता और सामूहिक शक्ति का निर्माण।”
जनपद अमरोहा के विभिन्न क्षेत्रों से आए अनेक समण साथियों की उपस्थिति में सामाजिक जागरूकता, समण पहचान, शिक्षा, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा नियमित रूप से इकट्ठा होकर समाज को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि समण समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता राजनीतिक विभाजनों से ऊपर उठकर सामाजिक स्तर पर एकजुट होना है।
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता राजकुमार अरुण ने कहा कि समाज का वास्तविक उत्थान सामाजिक एकता से ही संभव है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन से पहले उनका सामाजिक जीवन अधिक महत्वपूर्ण है और वे समाज के लिए सदैव उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भविष्य में भी हर परिस्थिति में समाज के साथ खड़े रहेंगे।
आर.पी. सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि समण समाज की अधिकांश समस्याओं का समाधान केवल राजनीति से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जब समाज स्वयं संगठित होकर सामाजिक चेतना के साथ आगे बढ़ेगा, तभी स्थायी परिवर्तन आएगा।
मास्टर के.पी. सिंह ने समाज में शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए युवाओं को शिक्षित और जागरूक बनाने पर विशेष बल दिया। वहीं देशराज सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए, तभी समाज सशक्त बनेगा।
समण अजित सिंह ने नियमित रूप से एक साथ बैठने की परंपरा विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि निरंतर बैठकों और संवाद से ही एकजुटता मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि यह केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक संस्कार बनने चाहिए।
सेवानिवृत्त निरीक्षक नत्थू सिंह ने समण महापुरुषों के आदर्शों को जीवन में ईमानदारी से अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि महापुरुषों की शिक्षाओं पर चलकर ही समाज स्थायी रूप से संगठित रह सकता है।
बैठक में समण प्रकाश सिंह ने समण पहचान के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “एक पहचान, एक आइडेंटिटी” के साथ जुड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि देशभर में लाखों-करोड़ों लोग समण पहचान को स्वीकार करते हुए सामाजिक एकता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे स्वयं भी समण पहचान अपनाएँ और समाज के अन्य लोगों को भी इससे जोड़ें।

समण बी. एस. आजाद ने कहा कि बोधिसत्व बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा दिए गए “संगठित रहो” के सिद्धांत को केवल उपदेश के रूप में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत संकल्प के रूप में अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति स्वयं नियमित रूप से समाज के बीच बैठने और जुड़े रहने का संकल्प ले, तो समाज की दिशा और दशा दोनों बदल सकती हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मत, मान्यता, संगठन, जाति, उपजाति अथवा व्यक्तिगत विचारों से ऊपर उठकर यदि सभी लोग केवल “समण” की साझा पहचान के साथ इकट्ठा हों, तो सामाजिक सम्मान, सहयोग, आत्मविश्वास और सामूहिक शक्ति स्वतः विकसित होगी। उन्होंने समण समाज से नियमित संगति, सन्निपात बहुल और सामाजिक बैठकों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।
नितिन पराग ने कहा कि नियमित रूप से इकट्ठा होना समाज की जड़ों को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक संपर्क जितना बढ़ेगा, समाज उतना ही आत्मनिर्भर और सशक्त बनेगा।
बैठक में यह भी विचार व्यक्त किया गया कि समण पहचान केवल एक नाम नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, आत्मसम्मान और एकता का आधार है। वक्ताओं ने कहा कि नियमित रूप से बैठने, संवाद करने और समाज के बीच रहने की संस्कृति विकसित करके ही समण समाज आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत सामाजिक आधार तैयार कर सकता है।
बैठक में राजकुमार अरुण, समण बी. एस. आजाद, समण प्रकाश सिंह, आर.पी. सिंह, मास्टर के.पी. सिंह, देशराज सिंह, समण अजित सिंह, नितिन पराग, पत्रकार राहुल, नितिन कुमार, जगदीप, नत्थू सिंह, यादराम सिंह, ओमप्रकाश सिंह, आनन्द पाल, श्योराज सिंह, जयवीर सिंह, आशीष चन्द्र, हरस्वरूप सिंह, डॉ. धरम सिंह, नरेन्द्र सिंह, विजय वाल्मीकि, जोनी कुमार, महेश कुमार, कुलदीप सिंह, धर्मेन्द्र कुमार, बिजेन्द्र सिंह सहित जनपद के अनेक प्रबुद्धजन एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
बैठक का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि समण समाज की सामाजिक शक्ति को मजबूत करने के लिए नियमित बैठकों, सन्निपात बहुल और संवाद की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।
“समण पहचान अपनाइए, नियमित रूप से इकट्ठा होइए और सामाजिक शक्ति को सुदृढ़ बनाइए। समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता और सामूहिक चेतना है।”
सम्पादकीय टिप्पणी
अमरोहा में आयोजित यह बैठक केवल एक सामान्य सामाजिक सभा नहीं रही, बल्कि समण पहचान के माध्यम से सामाजिक संगठन और सामूहिक शक्ति निर्माण का एक सशक्त संदेश बनकर उभरी। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि समाज की उन्नति का मार्ग किसी एक व्यक्ति, संगठन या विचारधारा से नहीं, बल्कि साझी पहचान, आपसी विश्वास, नियमित संवाद और सामूहिक भागीदारी से प्रशस्त होगा।
आज आवश्यकता इस बात की है कि प्रत्येक समण स्वयं “मैं समण हूँ” की पहचान को आत्मविश्वास के साथ अपनाए, अपने परिवार और समाज तक इसे पहुँचाए तथा संगठित समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाए। जब समाज एक पहचान के साथ खड़ा होगा, तभी सामाजिक सम्मान, सुरक्षा, जागरूकता और समृद्धि का मजबूत आधार तैयार होगा। -सम्पादक
