समण विचारधारा एवं समण पहचान पर हुआ मंथन
नई दिल्ली | समण सन्देश प्रतिनिधि
नरेला, दिल्ली स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर भवन, स्वतंत्र नगर में समण संघ का 54वाँ समण सन्निपात बहुल श्रद्धा एवं उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में समण समाज के साथियों ने सहभागिता करते हुए समण विचारधारा, समण पहचान तथा संघ की आवश्यकता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ समण संघ वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात समण स्पोक डी.एल. सागर ने उपस्थित समण भाई-बहनों को संबोधित करते हुए कहा कि समण समाज के लिए समण विचारधारा को समझना और जीवन में अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब समाज अपनी मूल पहचान को स्वीकार करेगा और संघ के माध्यम से एकजुट होगा, तभी समण समाज का सर्वांगीण विकास और सम्मान सुनिश्चित होगा।
बैठक में समण पहचान के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि अपनी समण पहचान को स्थापित करना ही आत्मसम्मान, सामाजिक जागरूकता और समण समाज की उन्नति का आधार है। इसी पहचान के माध्यम से समाज अपने गौरवशाली इतिहास और महापुरुषों की विरासत से पुनः जुड़ सकता है।
सन्निपात बहुल के दौरान समण संघ की मूल विचारधारा “इकट्ठे होकर ही समस्याओं का समाधान होगा” पर विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित साथियों ने कहा कि नियमित सन्निपात बहुल, संवाद और सहभागिता के माध्यम से ही समाज में एकता, सहयोग और जागरूकता को मजबूत किया जा सकता है।
कार्यक्रम में समण संघ के गोल्डन रूल्स (अमत्त विनय) की भी जानकारी दी गई। वक्ताओं ने इन नियमों को समण समाज में अनुशासन, आत्मीयता, सामाजिक उत्तरदायित्व और संघीय जीवन का आधार बताते हुए अधिक से अधिक समण परिवारों तक इन्हें पहुँचाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का समापन समण समाज की एकता, समण पहचान और संघ की भावना को सशक्त बनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
“समण पहचान ही समण समाज के सम्मान और उत्थान का आधार है।”
“संघ में शक्ति है, जुड़ेंगे तो जीतेंगे।”
