बिजनौर | समण सन्देश प्रतिनिधि
समण समाज की वर्तमान सामाजिक, शैक्षिक एवं संगठनात्मक चुनौतियों पर मंथन करने के उद्देश्य से पंचशील बुद्ध विहार में चिंतकों, विचारकों एवं समण साथियों की एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में समाज की दशा-दिशा, संगठन की भूमिका तथा भविष्य की कार्ययोजना पर गंभीर चर्चा की गई।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि समाज की समस्याओं का समाधान आपसी आरोप-प्रत्यारोप या विभाजन में नहीं, बल्कि संगठन और सामूहिक प्रयासों में निहित है। चर्चा के दौरान इस बात पर चिंता व्यक्त की गई कि शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद समाज के प्रति दायित्वों का निर्वहन अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाया है। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाना भी है।
विचारकों ने कहा कि समाज में पद, प्रतिष्ठा, मंच और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की दौड़ ने संगठनात्मक एकता को कमजोर किया है। सामाजिक, धम्मिक और राजनीतिक क्षेत्रों में अपेक्षित उपलब्धियां न मिलने के पीछे बिखराव और सामूहिकता की कमी को प्रमुख कारण बताया गया।
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि “किचड़ से किचड़ साफ नहीं होती”, इसलिए समाज की समस्याओं का समाधान सकारात्मक चिंतन, संवाद और संगठनात्मक एकता के माध्यम से ही संभव है। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में समण समाज के लिए सबसे बड़ा समाधान नियमित रूप से संघ में इकट्ठा होना, संवाद स्थापित करना और सामूहिक निर्णयों के आधार पर आगे बढ़ना है।
चर्चा के दौरान यह सुझाव भी सामने आया कि बुद्ध विहारों, संत आश्रमों, समाज भवनों और गुरु दरबारों में नियमित रूप से सन्निपात बहुल आयोजित किए जाएं, जहां समाज के लोग पास-पास बैठकर अपने विचार साझा करें, समस्याओं पर चर्चा करें और समाधान की दिशा में कार्य करें।
बैठक में उपस्थित चिंतकों ने समाज की एकता, शिक्षा, संगठन और जागरूकता को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संगठित समाज ही अपने अधिकारों, सम्मान और विकास के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है।
कार्यक्रम का समापन समाज के व्यापक हित में मिलकर कार्य करने तथा अधिक से अधिक लोगों को “जुड़ने और जोड़ने” के अभियान से जोड़ने के संकल्प के साथ हुआ।
“संगठन ही शक्ति है, एकता ही समाधान है”
