बरेली, उत्तर प्रदेश | समण सन्देश प्रतिनिधि
दिनांक 31 मई 2026 को महासमण सिद्धार्थ बुद्ध विहार, बरेली में समण संघ द्वारा एक संक्षिप्त किन्तु प्रेरणादायी सत्संग कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समण संस्कृति, समण सभ्यता, समण महापुरुषों के जीवन-दर्शन तथा समण संघ के संगठनात्मक सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
सत्संग में समण संत बाबूराम गौतम जी तथा समण संघ के प्रवक्ताओं श्रद्धेय अशोक सिद्धार्थ, अशोक कुणाल, अशोक समण, श्रीमती कुसुम देवी, अनीता सिंह, आकांक्षा अशोक एवं अपेक्षा अशोक ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने उपस्थित समाजजनों को समण संस्कृति की गौरवशाली परंपरा, सामाजिक चेतना और मानवतावादी मूल्यों से परिचित कराया।
कार्यक्रम के दौरान समण संघ के 10 गोल्डन नियमों की विस्तार से जानकारी दी गई तथा संगठन की कार्यप्रणाली और उद्देश्यों पर चर्चा की गई। साथ ही भारतीय संविधान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समण संघ संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन भी किया गया। वक्ताओं ने संविधान में निहित समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय के मूल्यों को समाज की प्रगति का आधार बताया।
सत्संग में तथागत बुद्ध, महासमण संत रविदास, संत कबीरदास, महात्मा ज्योतिराव फुले, माता सावित्रीबाई फुले, राजर्षि शाहूजी महाराज, बोधिसत्व डॉ. भीमराव अम्बेडकर, संत गाडगे बाबा, मातादीन भंगी, दीना-भाना, महामान्य कांशीराम सहित अनेक समण महापुरुषों के जीवन, संघर्ष, समाज-सुधार कार्यों और मानव कल्याण के लिए उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि इन महापुरुषों के विचार आज भी समाज को शिक्षा, संगठन और आत्मसम्मान का मार्ग दिखाते हैं।
समण संघ के प्रवक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि “समण संघ में शक्ति है” और समाज को संगठित होकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने बताया कि समाज केवल एक जाति का नाम नहीं, बल्कि एक व्यापक समण समाज है, जिसे शिक्षा, संगठन और जागरूकता के माध्यम से सशक्त बनाया जा सकता है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को समण संघ के गोल्डन विनय, संगठनात्मक अनुशासन तथा “जुड़ने और जोड़ने” के अभियान से भी अवगत कराया गया।
इस अवसर पर समण संघ की ओर से समण ग्रंथ, जागरूकता पंपलेट एवं समण कैलेंडर वितरित किए गए। साथ ही उपस्थित समाजजनों से प्रतिदिन सायंकाल आयोजित होने वाले ज़ूम पोर्टल से जुड़कर समण संस्कृति, इतिहास और सामाजिक जागरण के कार्यक्रमों में नियमित भागीदारी करने की अपील की गई।
कार्यक्रम का समापन समण समाज की एकता, संगठन, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को मजबूत बनाने के संकल्प के साथ हुआ।
