महासमण संत रविदास आश्रम में गूंजा “#मैंसमणहूँ” का उद्घोष
बिजनौर, उत्तर प्रदेश।
जनपद बिजनौर के एक गांव स्थित महासमण संत रविदास आश्रम में आज 127वें सन्निपात का भव्य आयोजन श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकता के वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समण समाज के लोगों, संतों, बुजुर्गों, युवाओं एवं महिलाओं ने भाग लेकर समण संस्कृति, संगठन और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया।
सन्निपात के दौरान आश्रम परिसर में “मैंसमणहूँ” का उद्घोष लगातार गूंजता रहा। उपस्थित वक्ताओं ने समण पहचान, सामाजिक एकजुटता, शिक्षा, संगठन और सांस्कृतिक जागरण पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि समण समाज की प्राचीन विरासत, मानवीय मूल्यों और सामाजिक समरसता को आगे बढ़ाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पहचान पर गर्व करना चाहिए तथा समाज के उत्थान के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
कार्यक्रम की शुरुआत संतों एवं महापुरुषों के चित्रों पर माल्यार्पण तथा श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इसके पश्चात समण संस्कृति, इतिहास और सामाजिक चेतना से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने समाज के लोगों से आपसी भाईचारे, सहयोग और संगठन की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।
सन्निपात में उपस्थित श्रद्धालुओं ने एक स्वर में “संघं नमामि” का उद्घोष करते हुए समाज की एकता और संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान समण समाज के युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी की और सामाजिक जागरण से जुड़े विभिन्न संदेश प्रस्तुत किए।
आयोजन के उपरांत सभी उपस्थित लोगों को मिष्ठान वितरण किया गया तथा विशाल लंगर का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने प्रेमपूर्वक प्रसाद ग्रहण किया और सामूहिक भोजन में भाग लिया। लंगर में समाज के सभी वर्गों के लोगों ने मिलकर सेवा कार्य किया, जिससे आपसी सहयोग और भाईचारे का सुंदर उदाहरण देखने को मिला।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी आगंतुकों, संतों और समाजजनों का आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से समण समाज की एकता और जागरूकता को निरंतर मजबूत करने का संकल्प लिया।
“संघं नमामि” और “#मैंसमणहूँ” के जयघोष के साथ 127वाँ सन्निपात सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
